Saturday, October 2, 2010

सर्वश्रेष्ठ रचना तो ये हैं


मुझसे कल किसी ने पूछा कि तुम्हारा लिखना अधिकांश बच्चों के इर्द-गिर्द ही क्यों होता है? "इसलिए क्योंकि ये दोनों ही मेरी सर्वश्रेष्ठ रचनाएं हैं।" बल्कि लिखना भी शुरू किया तो इन्हें बड़ा करते हुए। उसके पहले न्यूज़ चैनल की मारा-मारी आपको अपने भीतर एक बार झांक लेने का मौका भी कहां देती है। समाचारों और विचारों की भीड़ में रिश्ते, छोटी-छोटी खुशियां, नोस्टालजिया - इन सबके लिए जगह नहीं होती।

जब उस भीड़ से निकल ही चुकी हूं तो कुछ अलग रास्ता ही चुनूं ना। क्यों ना फूल, पत्ते, हवा, बादल, बिजली, बारिश, रंग, तितली पर कविताएं लिखी जाएं। क्यों ना बकरी, गाय, हाथी, बिल्ली, शेर, लोमड़ी, खरगोश, बगुले को अपने बच्चों की तरह अपना भी साथी बनाया जाए और उनपर भी कहानियां लिखी जाएं। तो बस, तय कर लिया है कि इस महीने यानि अक्टूबर में जब मेरे बच्चों का चौथा जन्मदिन होगा, तो इस महीने का मेरा पहला लिखना, मेरी पहली सोच, मेरी सुबह का पहला आग़ाज़ उनके लिए होगा। ये मेरा उनके लिए जन्मदिन का तोहफा होगा। तो बस शुरुआत अभी से। आज कुछ पुरानी कविताओं को नया रंग दे रही हूं जो मैंने उनके लिए लिखीं।

कविता 1

इंतज़ार

थोड़ा डर है, थोड़ी-सी घबराहट, लेकिन तस्वीर है आंखों में,
मेरा चेहरा, तेरी पलकें और कुछ शरीर है बातों में।

वो होगा तुम-सा, मुझ-सा भी, घूंघर भी होंगे बालों में
आंखें हीरा,
रंगत सोना, हंसता आए ख़्यालों में।

उसकी नन्हीं-सी मुट्ठी में आ जाएगी मेरी उंगली,
पैरों की थिरकन सुनती हूं जब उसकी कोई बात चली।

घर भर जाए, और आंखें भी, जब आंचल में आएगा वो
प्यारी-सी अपनी खुशबू से आंगन को महकाएगा वो।

Haiku 1


Waxing moon outside
and two inside me.
My night has never been so full.


Haiku 2

कौन हो तुम

वो गीत हूं और कविता भी
हूं वो नज़्म
जो तुम पन्नों में तलाशते फिरते हो।

(20 अगस्त, 2006)

बिटिया

कुछ बोलूं या कि ना बोलूं
ये भेद धीरे-से खोलूं।
जो मुझसे छुप-छुप बात करे
बिटिया की प्यारी आंखें हैं।

तेरे मेरे बीच

राज़ की बात है ये
वो मुझसे साझा करती है।
कहती है, मेरी बांहों में
दुनिया सिमटती है।
तुम्हारी नज़रों से जो देखा
आसमां से सोनपरी
घर में उतरती है।
तितली की रंगत,
फूलों की खुशबू
किरण सुबह की
चेहरे पर फिसलती है।

4 comments:

Anjana (Gudia) said...

राज़ की बात है ये
वो मुझसे साझा करती है।
कहती है, मेरी बांहों में
दुनिया सिमटती है।
तुम्हारी नज़रों से जो देखा
आसमां से सोनपरी
घर में उतरती है।
तितली की रंगत,
फूलों की खुशबू
किरण सुबह की
चेहरे पर फिसलती है।

khoobsurat ehsaas!

उन्मुक्त said...

बेटों के जन्मदिन पर अभी से बधाई।

मो सम कौन ? said...

आपके द्वारा तय की गई प्राथमिकतायें एकदम सही हैं।

Manoj K said...

यह सच सर्वश्रेष्ठ रचना है..