शनिवार, 1 जनवरी 2011

मंगल हो नया साल!

चंद अनाज के दाने,

दानों में गज़ब का स्वाद/
एक पैबंद लगी जेब,
जेब में सिक्कों की खनखनाहट/
छोटा सा घर,
और घर में ढेर सारा प्यार/
एक ख्वाब,
ख्वाब की कोमल तासीर/
कुछ अल्फाज़,
लफ़्ज़ों के बेहतर मायने/
नए रिश्ते,
रिश्तों के अटूट बंधन/
मुट्ठी भर आसमान,
और उन्मुक्त परवाज़/
नया साल आपके लिए
लेकर आये इतनी-सी थाती,
यही दुआ है!

5 टिप्‍पणियां:

गिरिजेश राव, Girijesh Rao ने कहा…

मुट्ठी में आसमान

नववर्ष आप के लिए, आप के पूरे परिवार के लिए और आप के ब्लॉग पाठकों के लिए मंगलमय हो।

मनोज कुमार ने कहा…

सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु।
सर्वः कामानवाप्नोतु सर्वः सर्वत्र नन्दतु॥
सब लोग कठिनाइयों को पार करें। सब लोग कल्याण को देखें। सब लोग अपनी इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करें। सब लोग सर्वत्र आनन्दित हों
सर्वSपि सुखिनः संतु सर्वे संतु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद्‌ दुःखभाग्भवेत्‌॥
सभी सुखी हों। सब नीरोग हों। सब मंगलों का दर्शन करें। कोई भी दुखी न हो।
बहुत अच्छी प्रस्तुति। नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं!

साल ग्यारह आ गया है!

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

itni pyari dua:)
bhagwan aapko sirf khushiyan de!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना ...

नव वर्ष की शुभकामनाएँ

PN Subramanian ने कहा…

आपको नव वर्ष मंगलमय हो.