Sunday, April 1, 2012

आओ जीते हैं, हम और तुम

२१ साल की उम्र में पायलट बन गई थी वो - इंटरनेशनल सेक्टर में बोईंग ७४७ चलानेवाली सबसे कम उम्र की सबसे हसीन पायलट। हमें रिया पर फख्र  था। अब भी है क्योंकि अब वो मल्टिपल इन्जरीज़ के साथ टूटी-फूटी हड्डियों को समेटे हुए लाइफ सपोर्ट सिस्सटम पर जूझती हुई हिम्मत की डोर थामे मौत को हर पल मात दे रही है। रिया मेरी बहन है, बुआ की बेटी। २४ साल की है, एक हफ़्ते पहले कार एक्सिडेंट में बुरी तरह ज़ख़्मी हुई। ये हादसा बुलाया हुआ था। रातभर पार्टी करने के बाद पांच बच्चों ने सुबह लॉन्ग ड्राईव पर जाना तय किया। हम चाहे तो लम्हों को कोसें, हम चाहें तो किस्मत को दोष दें, हम चाहें तो ये भी कह दें कि हादसे तो मिल सकते हैं किसी को भी किसी भी मोड़ पर। सच भी है, लेकिन बुआ की आंखों में तैरते आंसू देख दिल सहम जाता है। मेरे भी तो दो बच्चे हैं और जाने कितने हैं छोटे भाई-बहन। या अल्लाह, सबको अक्ल दो, सबको दूर रखो बुरी बलाओं से।

डॉक्टर मौसा सर्जन हैं। जाने कितनों की ज़िन्दगी बचाई होगी, कितने को निकाला होगा मौत के मुंह से। उन्होंने जानबूझकर किसी आफ़त को गले नहीं लगाया था। जनवरी की एक धुंध भरी रात में गांव से आते हुए सड़क दुर्घटना का शिकार हुए। पिछले तीन महीने से आईसीयू में हैं और होश में नहीं आए। ना जीते हैं ना मरते हैं। परिवार उन्हें देख-देखकर तिल-तिल मर रहा है, सो अलग।

सीपू अभी तो तीस की भी नहीं हुई। अभी-अभी प्यारा-सा बेटा हुआ उसको। पिछले बारह सालों से जानती हूं उसको, और जब भी उसके बारे में सोचती हूं या फेसबुक पर तस्वीर देखती हूं कोई तो जाने क्यों लगता है, उसके गोरे माथे को चूम लूं और गले लगाकर कहूं, खुश रहना ऐसे ही। परिवार ने तो उसके लिए खुशियों का सारा इंतजाम कर लिया था - मन लायक पढ़ाई, अच्छा-सा पति, बहुत प्यार करनेवाले लोग और अब बेटा। ईश्वर जाने क्यों परीक्षाएं लिया करता है इतनी? चंद हफ्तों के बच्चे की मां सीपू अब ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करा रही है। कीमोथेरेपी के तीन सेशन्स के बाद सर्जरी होगी उसकी। अपने बच्चे को तो उसने जीभर के प्यार भी नहीं किया अभी।

राजकुमार अंकल की बाईपास सर्जरी होनी है, ९५ फ़ीसदी धमनियां ब्लॉक्ड हैं उनकी। जाने मेडिकली इसका मतलब क्या होता है? सिन्हा अंकल भी उसी अस्पताल में जीभ के कैंसर का इलाज करवा रहे हैं। मुन्ना चाचा की दोनों किडनियां काम करना बंद कर चुकी हैं। डायलसिस पर हैं वो, और जी रहे हैं किसी तरह।  उनकी सेवा में चाची के साथ-साथ ८० साल के बाबा लगे हैं इन दिनों।

सुबह-सुबह मन कर रहा है कि फूट-फूट कर रोऊं। ये सारे लोग मेरी किसी कहानी के किरदार नहीं, ना ट्रैजेडी की नई स्क्रिप्ट लिख रही हूं इन दिनों। जानती हूं कि दर्द इससे भी बड़े होते होंगे, दुख ने तो अभी छुआ ही नहीं ठीक से मुझे। इम्तिहान इससे भी बड़े देने होंगे अभी तो कि पूरी ज़िन्दगी बाकी है और किसी भी मोड़ पर मिल जाया करते हैं हादसे।

फिर इतनी बेक़रारी क्यों? खुलकर अपनी शर्तों पर जी लेने की हिम्मत क्यों नहीं हममें? किस लम्हे का इंतज़ार किया करते हैं हम? क्या होगा जो कल होगा और आज नहीं? इतनी सारी दुश्चिंताओं का सबब? घर बड़ा हो, गाड़ी बड़ी हो, सेविंग्स बड़ी हों, बच्चे बड़े-बड़े बनें, हम छू आएं ऊंचाइयां आकाश की... ऐसी बेताबी ही क्यों? क्यों इतना अहं? क्यों ये मलाल कि ज़िन्दगी के निकल गए तीस साल? जो अभी, इसी लम्हे ऊपरवाले ने त्रिशंकु की तरह लटका ही दिया मरने और जीने के बीच, तब? शुक्र ना मनाएं कि जिया इतने साल, और जो मिला है, ख़ुदा की नेमत है। शुक्र ना मनाएं कि मिली एक शाम जब तुम सब थे आस-पास?

जाने क्यों जी में आया है कि सबको फोन करके कहूं, आई लव यू। कहूं कि अपना ख़्याल रखना। कह ही दूं कि हमें लगता है ऐसा कि अकेले और तन्हां ही हैं हम। लेकिन हमारे जीने-मरने से कई लोगों को फर्क पड़ा करता है। सुनो मेरी बात ध्यान से, लड़ने-भिड़ने और बेमानी संघर्षों के लिए कम पड़ जाया करती है ज़िन्दगी। जो प्यार से गले लगा लो, थाम लो दो घड़ी के लिए किसी का हाथ और रख दो कंधे पर हाथ तो लगता है, जितना है बहुत है।

मैं प्यार ही करती हूं तुमसे, कि जाने कल हो ना हो। आओ, जी लेते हैं इस पल, हम और तुम।

5 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

पीड़ा के गाढ़ेपन को बस प्यार और संवेदना से थोड़ा कम किया जा सकता है।

सागर said...

ये सबसे सही रास्ता है.... कालजयी टाइप.... ऐसी चीजें सहेज ली जाती हैं.

Rahul Singh said...

''किसी कहानी के किरदार नहीं...'' पर पहुंचते तक सोचता रहा कि ऐसा कोई वाक्‍य न आ जाए.

Arvind Mishra said...

ओह, सभी को मेरी भी शुभकामनाएं और आपके लिए स्नेह संबल के दो शब्द !

Bhoopesh Dhurandhar said...

Wishes for all your relatives , May god bless the.
Very thoughtfull post....

It's true that suffering is one the preptual truths of our life and one has to search for happiness in those such moments also.We must enjoy each and every moments of our life,, rather then worrying about future which we don't know and can not do anything to change.