Monday, March 2, 2015

मॉर्निंग पेज १८ उदयपुर से लौटकर

१९९६ में मैं फ़र्स्ट ईयर कॉलेज में थी। हमारा सालाना थिएटर प्रोडक्शन हुआ करता था। उस साल जिस डायरेक्टर को बुलाया गया था उनका नाम था पीयूष मिश्रा। एनएसडी से थे, और बारह-तेरह सालों से थिएटर कर रहे थे। मेरी स्टेज पर जाने की औकात तो थी नहीं तब (वो तो ख़ैर अब भी नहीं है), इसलिए बैकस्टेज वॉलेन्टियर का ज़िम्मा मुझ फर्स्ट ईयर फच्चा को दिए जाने में किसी को कोई दिक्कत नहीं आई। हम जैसे फच्चों का काम प्रॉप्स एक जगह से उठाकर दूसरी जगह करना, लाइटिंग में असिस्ट करना, एक्टर्स के लिए जगह मार्क करना या किसी की ग़ैर-हाज़िरी में उसकी रिप्लेसमेंट बनकर प्रॉप बन जाना था। मैं सिर्फ एक ही वजह से जाती थी - पीयूष का गाना सुनने। एक बगल में चांद होगा, एक बगल में रोटियां उसी प्रोडक्शन एक थी सीपी, एक थी सीली के लिए लिखा गया था। हुस्ना भी उसी दौरान लिखा गया था। 

इनमें से कुछ बातें मैं भूल गई थी, लेकिन पीयूष मिश्रा को सब याद था। इसलिए हम उदयपुर में मिले तो बातचीत के सिरे यूं खुलते गए जैसे पहले तह-तह करके इसी मुलाक़ात के लिए कई सारी बातें पहले से किसी बक्से में रखी गई हों। ये मेरे लिए झिझक लेकिन फख़्र की बात थी कि हम एक ही मंच पर अपने-अपने सफ़र के बारे में बात करने जा रहे थे - क्रिएटिव सफ़र के बारे में। पीयूष की तुलना में मेरे पास कहने को उसका शतांश भी नहीं रहा होगा। 

लेकिन डिनर टेबल पर और ही माहौल था। पीयूष कविताएं सुनाते रहे। हम तालियां बजाते रहे। इस बीच जीना-मरना, पूर्वजनम, कर्म, धर्म, स्वर्ग-नरक, घर-परिवार, बीवी-बच्चे, मां-बाप, गीत-कहानियां सबकी बातें होती रहीं। 'कन्फे़स करो। माफ़ी मांगो। हर ग़लती की माफ़ी मांगो। तुम एक ज़रिया हो, करवा कोई और रहा है। ख़ुद को हुनरमंद मत समझो। ख़ुद को ब्लेस्ड समझो, गिफ्टेड समझो। मैं भी गिफ्टेड ही हूं बस, और वो किसी औऱ का गिफ्ट है,' पीयूष की सिर्फ़ इसी बात को मैं अपने साथ दिल्ली ले आई हूं गांठ बांधकर। यूनिवर्स ने उदयपुर के इस एक सफ़र में मेरे लिए कई संदेसे भिजवाए हैं। 

उन्हीं संदेसे में से एक मेरे सहयात्री का मेरे बग़ल में औचक होना था। एंडी - अपना नाम यही बताया उन्होंने। (मैंने आकर गूगल किया जो पता चला कि जनाब बहुत बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट हैं और मुंबई के मड आइलैंड पर उनकी अरबों की संपत्ति है। बिज़नेस इन्टरेस्ट क्यूबा से लेकर आगरा तक में फैले हुए हैं।) 

एंडी को मुंबई की फ़्लाईट में होना था, लेकिन फ़्लाईट मिस हो गई और उन्हें किस्मत ने मेरे बगल में बिठा दिया। धोनी और मौसम से शुरु हुआ बातचीत का सिलसिला दार्शनिक हो गया। एक घंटे बीस मिनट की फ्लाईट में एंडी ने मुझे ज़िन्दगी जीने के सात सूत्र दिए। 

1. Consider yourself blessed. You are in this journey of life for a purpose.  
2. Don't lie. Either to yourself or to others. Stay mum if need be, but don't lie. 
3. Take care of your health. Eat healthy. Drink a lot of water. Especially when you are angry. 
4. Respect your sweeper, and your maid, and your driver, and everyone around you. But respect them the most who serve you and do your menial jobs. Offer them a meal. A glass of water. Always be grateful towards them. 
5. Never ever criticise. Never. It is not going to either change the person or the circumstance. If you can't change something, stay out of it. Don't get involved. 
6. Detach. Nothing belongs to you. Nothing. Accept everything with gratitude, but don't attach yourself to it. 
7. Don't use foul language. Be kind through your words, and through what you say. Every word, action or thought causes a reaction in the Universe. Everything gets recorded as karma, and comes back to you. 
   
एक ऐसा शख़्स जो स्कूल न गया हो, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि गरीबी की वजह से स्कूल की फ़ीस भरने के पैसे नहीं थे। एक ऐसा शख़्स जिसने बर्तन धोने से अपना करियार शुरु किया और बात में कपड़े की मिलों में सुपरवाइज़र की नौकरी करता रहा। एक ऐसा शख़्स जिसे अपने मोबाइल पर संदेसे तक नहीं पढ़ने आते, और चिट्ठी लिखना नहीं आता। एक ऐसा सख्स जिसने अपने बच्चों के लिए एक बिज़नेस एम्पायर खड़ा कर दिया, और अब सिर्फ़ अपनी पत्नी के साथ ढेर सारा वक़्त गुज़ारने की ख़्वाहिश रखता है। कोई एक ऐसा शख़्स किसी फ्लाईट में औचक किसी अनजान को अपनी ज़िन्दगी की कहानी सुनाते हुए ज़िन्दगी जीने के बेसिक तरीके बता जाए तो उसे कैसे संजीदगी से न लिया जाए? 

विदा होते हुए एंडी ने कहा, 'Give my love and blessings to your children. And a big hug to your husband. Convey my regards to elders in your family. And chase your dream. Nothing is impossible. My life is an example of it. God bless you!'

अरमानी के सूट और सिल्क के स्कार्फ़, फेडोरा हैट और गुच्ची के चश्मे वाले सिंधी बिज़नेसमैन एंडी से दुबारा मिलना हो एक पेपटॉक के लिए, तो मैं जानती हूं एंडी के घर का पता। ढूंढ लूंगी। ऐसे लोगों से बार-बार मिलना चाहिए। एंडी मड आयलैंड के पूलावाला बंगले में रहते हैं।  


4 comments:

Pooja Sharma Rao said...

This is one of the evidences of how creative souls enrich each other and that is part of the gift too.

Arvind Pandey said...

Very nice things said by Mr.Andy,
Nice post

Abhishek Ojha said...

लकी एंडी :)

Monica Gupta said...

5.Never ever criticise. Never. It is not going to either change the person or the circumstance. If you can't change something, stay out of it. Don't get involved.

its very inspiring and will always remember this.