Thursday, January 26, 2012

एक कविता, एक अनुवाद: 2


Winter wind
roams the sky
And the starlit night conspires
For she is veil-bound tonight,
Guarded and watched.
Walk past her
And don't look back
Let her wait
Behind the veil.

Let this be the night
Of shedding all the tears
Allocated for a lifetime
Let this be the night
Of parting and fears.
When she gets tired
of standing alone
Of the scent of her sweat
and beat of her heart

When she pushes her veil back
Ambush her,
kill her,
But don't hold her
And don't ever let her go.

सर्द पवन
नभ की भटकन।
सितारों से ढंकी साज़िश की रात
कि आज है उसके घूंघट
के सतर्क पहरों में बंद होने की बात। 

किनारे से जाओ
और न देखो मुड़कर।
रहने दो इंतज़ार
उस घूंघट के पार।

जीवन भर संचित आँसुओं को
बह जाने दो आज।
कि है ये विरह
और ख़ौफ़ की रात।

थक जाए जब वह
अकेली राह तकते 
थक जाए जब वह
निज स्वेद की गन्ध और
हृदय की धड़कन से।


जो झटके वो घूंघट
लगाए रहना घात,
ले लेना उसकी जान,
लेकिन न थामो उसे
और न जाने दो उसे कभी भी,
कहीं भी।

2 comments:

Madhuresh said...

अनु जी, उम्दा poetry और उससे भी बेहतर अनुवाद!
सधन्यवाद!

प्रवीण पाण्डेय said...

गहन भाव, संगत देता अनुवाद..