Saturday, February 25, 2012

एक निश्छल-सी मुलाकात

"फोन रखो, फोन रखो, मेरे सामने से नवीन निश्चल आ रहे हैं।"

"नवीन निश्चल कौन? देख भाई देख वाले?"

"नहीं। मतलब हां। वही नवीन निश्चल लेकिन हंसते ज़ख़्म और बुढ्ढा मिल गया वाले।"

"जाओ लड़की, तुम्हें बुढ्ढा मिल ही गया आख़िर", मेरी दोस्त ने फोन रख दिया था और मैं खुद को सहेज-समेटकर चेहरे को सामान्य करने की कोशिश करते हुए सामने से आ रहे शख्स की ओर बढ़ गई थी। हम आरे कॉलोनी के एक स्ट़ूडियो में शूट कर रहे थे। मैं मुंबई में नई थी और पर्दे पर नज़र आनेवाले कलाकारों को आंखों के सामने हर रोज़ देखती, लेकिन याद नहीं कि किसी की ओर ऐसे बात करने के इरादे से क़दम बढ़ाए हों। मुझे किसी से बातचीत शुरू करने में बहुत वक्त लगता है लेकिन नवीन निश्चल से जाने क्यों एक बार में बात करने पहुंच गई थी।

"हैलो सर, आर यू आउट ऑन अ ब्रेक?"

"नॉट रियली। बट वी आर गेटिंग रेडी फॉर द नेक्स्ट शॉट। डू आई नो यू, बाई द वे?"

"नमस्ते, मेरा नाम अनु है और मैं पीछे वाले स्टूडियो में प्रोडक्शन देख रही हूं। नाउ यू नो मी। एंड आई नो यू, ऑफ कोर्स।"

"यू नो ऑफ मी।"

"राईट, बट वी कैन स्टिल टॉक, कैन वी नॉट?" मैंने झेंपते हुए कहा।

"ऑफ कोर्स वी कैन। खड़े होकर या बैठे कहीं?"

मैं कुर्सियां खींच लाई। उनका रंग इतना ही गोरा था कि मैं एक बार को सोचती रही कि इनके लिए मेकअप तो दमकती त्वचा को छुपाने के लिए करना पड़ता होगा। सावन भादो में इसलिए रेखा और काली नज़र आती हैं अपने ही गोरे हीरो के आगे।

"कहिए, क्या बात करना चाहती हैं?" वो कुर्सी पर पीछे होकर बैठ गए थे, दाहिनी टांग पर दूसरी टांग चढ़ाकर। हथेलियों की गोरी, लंबी उंगलियां चेहरे को थामे थीं। सफ़ेद बाल पेशानी छोड़कर थोड़ा-सा चांद दिखाते हुए पीछे की ओर खिसकने लगे थे। उनकी गोरा रंग अब आंखों को चुभने लगा था।

"मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हूं। मैं 11 साल की थी जब हंसते ज़ख्म देखी थी, 1989 में। जनरल इलेक्शन्स के टाईम में। भूली नहीं हूं वो फिल्म।"

"उम्र क्या है आपकी?"

"जी, बाईस साल।"

"हंसते ज़ख्म आपकी पैदाइश के पहले की फिल्म है।"

जी... (जी में आया कह दूं कि मुझे अपने पैदाइश के पहले की तमाम चीज़ें अच्छी लगती हैं। डिज़ास्टर तो मेरी पैदाइश के साथ ही आया होगा दुनिया में, लेकिन चुप रही।)

"हां, चेतन आनंद की फिल्म थी, मेरी अबतक की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक... प्रिया एंड आई एज़ द लीड पेयर। प्रिया को पहचानती हैं आप?"

"जी, हीर रांझा आई थी उनकी। गाने सुने, फिल्म नहीं देखी मैंने।"

"हम्म।"

"आस्था भी देखी मैंने", संभलते और डरते हुए कहा मैंने।

"हां, यू आर एन एडल्ट, यू मस्ट हैव सीन इट।" 

मैं तय नहीं कर पा रही थी कि अब बातचीत का सिरा कैसे आगे बढ़ाऊं। फिल्मों पर, देख भाई देख पर, उनके कैरेक्टर रोल्स पर और इस उम्र में भी काम करने की मजबूरी पर। पूछना चाहती थी कि रेखा के साथ सावन भादो करते हुए और फिर २५ साल बाद आस्था में काम करते हुए कैसा लगा होगा? बुलंद सितारे जब गर्दिश में जाने लगे होंगे तो कैसा लगा होगा? आपका कोई परिवार नहीं? कोई अपना नहीं? आप इस उम्र में भी क्यों एक्टिंग करते हैं? क्या एक्टिंग भी लत होती है एक तरह की? कई सवाल मन में थे, लेकिन पूछने में हिचक थी। मैं इन्हें जानती भी तो नहीं। जाने क्या सोचें ये मेरे बारे में।

"आई विल हैव टू टेक योर लीव। बट आई ओ दिस यंग फैन ऑफ माईन अ कप ऑफ टी। चाय?"

मैंने स्पॉट बॉय के हाथ से चाय ले ली। कुछ ना सूझा तो पूछा, आप यहां टीवी सीरियल की शूटिंग करने आए हैं?

"नहीं, एक फिल्म की। इनडोर शूट है। डॉक्टर बना हूं मैं। इट्स ए कैमियो।" (फिल्म का नाम बताया उन्होंने मुझे, लेकिन अब याद नहीं।)

करीब-करीब जीभ जलाते हुए मैंने चाय खत्म की और उन्हें अटपटा-सा थैंकयू कहती हुई वापस अपने फ्लोर पर आ गई।

२००६ में न्यूज़ रूम में खबर आई कि किसी गीतांजली निश्चल की खुदकुशी की। टिकर में डालना है या वीओवीटी बनाना है, मैंने अपने एडिटर से पूछा था। वीओवीटी.... नवीन निश्चल के वीडियो के साथ। गीतांजली ने अपने पति नवीन निश्चल और उनके भाई पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए खुदकुशी की थी। नवीन निश्चल हिरासत में ले लिए गए और अपनी ज़मानत याचिका में बेगुनाही की गुहार करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी डिप्रेशन का शिकार थीं और मेडिकेशन पर थीं। उनके एक्सट्रीम मूड स्विंग्स की वजह से उन्हें घर छोड़ना पड़ा था और वो गीतांजली के साथ रहते ही नहीं थे।

उनपर पैकेज बनाते हुए मैं बार-बार नवीन निश्चल से हुई उस छोटी-सी मुलाकात के बारे में सोचती रही। मायानगरी में हक़ीक़त फिल्मों से कहीं ज़्यादा हैरतअंगेज़ होते हैं। जब आरे कॉलोनी में मैंने अपने क्रू को नवीन निश्चल से हुई मुलाकात के बारे में बताया तो मेरे प्रोडक्शन मैनेजर सतीश तेवाणी ने कई कहानियां सुनाईं। उनकी पहली पत्नी नीलू कपूर के बारे में, जो शेखर कपूर की बहन और देव-चेतन-विजय आनंद की भांजी थीं। शराब और शबाब के उनके प्यार के किस्से मशहूर थे और नवीन का नाम पद्मिनी कपिला और उसके बाद पम्मी नाम की किसी महिला से जुड़ा। गीतांजली खुद तलाकशुदा थीं और जब पूरी इंडस्ट्री को नवीन की कमज़ोरियों का पता था तो भी उन्होंने उनसे शादी करने का फ़ैसला किया। फिर नवीन उनकी हालत के लिए कहां ज़िम्मेदार थे? गीतांजली ने जानबूझकर ओखली में सिर नहीं डाला था?

नवीन निश्चल पिछले साल मार्च में एक शूट के लिए रणधीर कपूर के साथ पुणे जाते हुए दिल के दौरे का शिकार हुए और रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। कोई वजह है नहीं कि मैं नवीन निश्चल से हुई उस एक मुलाक़ात को ऐसे याद करूं। लेकिन कई बार ज़िन्दगी हमें कई-कई रूपों में अलग-अलग मसलों पर सबक सिखाने आ जाया करती है। जाने संतुलन किस चिड़िया का नाम होता होगा, जाने क्यों कुछ लोग ताउम्र भटकने को अभिशप्त होते हैं और जाने क्यों कोई मुकम्मल ज़िन्दगी किसी को कभी नसीब नहीं होती। लेकिन स्टारडम अपने साथ कई श्राप लिए चलता है और आसान नहीं किरदारों के झुरमुट में, फ़रेबी चेहरों को जीते हुए अपना कोई भी असली चेहरा बचाए रखना। वैसे ये असली चेहरा भी जाने क्या बला है? मुझसे तमीज़ से बात करते नवीन के चेहरे को लेकर कम-से-कम मेरे मन में तो उनके असली रूप को लेकर कोई दुविधा पैदा नहीं हुई थी।

नवीन ने कई बार प्यार किया, कई बार धोखे खाए और दिए और हंसते ज़ख्म की उनकी सह-अदाकारा प्रिया राजवंश ने ज़िन्दगी में सिर्फ एक बार प्यार किया - चेतन आनंद से, और वो प्यार ऐसा निभाया कि चेतन आनंद की मौत के तीन-चार साल बाद ही चेतन के बंगले में ही उनकी हत्या भी कर दी गई। फ़साद की जड़ वो बंगला था जिसका एक-तिहाई हिस्सा चेतन अपने बेटों के साथ-साथ अपनी महबूबा प्रिया राजवंश के नाम कर गए थे।

प्रिया राजवंश की कहानी फिर कभी। फिलहाल उस चमकीली दुनिया के धुंधली, गंदली, मर्की हक़ीक़त को भूलकर हंसते ज़ख्म की एक कव्वाली लूप मोड में चला रही हूं आज के लिए। कैफ़ी आ़़ज़मी के गीत में जादू डाला है मदनमोहन ने।

4 comments:

Rahul Singh said...

नवीन निश्‍चल की ''वो मैं नहीं'' याद आई.

Kailash Sharma said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति..

प्रवीण पाण्डेय said...

एक अजब दुनिया है यह भी,
सीधे दिल का मोल नहीं...

Arvind Mishra said...

और संस्मरण भी..... :(